
कवियों की देशभक्ति, संवेदना और हास्य के संगम से गूंजा जीवीएम का सभागार
लोकपथ लाइव, सोनीपत: यहां जीवीएम गर्ल्स कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय ‘लोक स्वर’ उत्सव का भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साथ संपन्न हुआ। समापन सत्र में साहित्य, संवेदना, हास्य और राष्ट्रभाव का ऐसा मनोहारी संगम देखने को मिला, जिसमें सभागार बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।


उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार तथा जीवीएम गर्ल्स कॉलेज, सोनीपत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘लोक स्वर’ उत्सव के समापन सत्र में साहित्य, संवेदना, हास्य और राष्ट्रभाव का ऐसा मनोहारी संगम देखने को मिला, जहां दर्शकों ने कवियों की कविताओं का भरपूर आनंद लिया और हर प्रस्तुति को खुले दिल से सराहा। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर सोनीपत की तहसीलदार श्रीमती कीर्ति दहिया रहीं। जबकि अध्यक्षता जीवीएम प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. ओ.पी. परूथी ने की। कवि सम्मेलन का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

कवि सम्मेलन की गंभीर शुरुआत कवि कृष्ण गोपाल सोलंकी ने की। उन्होंने पौराणिक पात्रों के माध्यम से जीवन दर्शन प्रस्तुत करते हुए अपनी पंक्तियाँ यूं पढ़ीं—
“धैर्य धार कर दुःख में, सुख की आस में काटे, कोई धृतराष्ट्र बनकर स्वयं कुल के नाश में काटे…
जनक ने भी सिया के वास्ते राजा ही देखा था, वक़्त देखो फिर चौदह वर्ष वनवास में काटे।”
वहीं सुप्रसिद्ध कवि विकास यशकीर्ति ने बेटियों के प्रति समाज की संवेदनहीनता पर ऐसे मार्मिक प्रहार किया—
“संपत्ति का ब्यौरा जब मांगा मुझसे आयकर वालों ने, मैंने खाली कॉलम में बस बिटिया भर कर छोड़ दिया।”
काव्य मंच संचालन कर रहे ओज कवि दिनेश शर्मा ‘दिनेश’ ने देशभक्ति का ज्वार उठाते हुए अपनी पंक्तियाँ पढ़ीं, तो पूरा सभागार राष्ट्रभाव से ओतप्रोत हो उठा और श्रोताओं ने जोशीली तालियों से उत्साह प्रकट किया। उन्होंने माहौल को ऐसे बदला-
“सारे जग को राह दिखाता अपना देश महान,गूंजे थल पर गूंजे नभ में, जय जय हिंदुस्तान।”
सम्मेलन में कवयित्री अनामिका वालिया शर्मा ने तिरंगे की आन-बान-शान को समर्पित भावपूर्ण पंक्तियों से दर्शकों का यूं मन मोहा—
“तिरंगा हूँ मेरे हर रंग को समेटकर रखना,विरासत हूँ शहीदों की मुझे सहेजकर रखना।”
वरिष्ठ कवि गजेन्द्र सोलंकी ने नए भारत के निर्माण और सकारात्मक सोच का संदेश देती ओजस्वी रचना प्रस्तुत की—
“नए युग की कहानी का, नया उल्लास लिखना है। दिलों की धड़कनों पे प्यार का, एहसास लिखना है।।
बदलते वक्त की आहट, सुनी तो साँस यूँ बोली। हमें भारत की धरती पर, सुखद मधुमास लिखना है।। ”
वहीं हास्य कवि महेंद्र अजनबी ने अपनी विशिष्ट शैली में ‘डरावनी कविता’ सुनाकर सभागार में हंसी के फव्वारे छोड़ दिए। दर्शकों ने उनकी रचना का भरपूर आनंद लिया और तालियों से कवि का उत्साहवर्धन किया। इसी प्रकार हास्य-व्यंग्य की धारदार रचनाओं से दीपक गुप्ता ने माहौल को हल्का-फुल्का करते हुए दर्शकों को ठहाकों मारने पर मजबूर कर दिया। से झूम उठे और सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा।
कवियों का आभार व्यक्त
‘लोक स्वर’ उत्सव के समापन पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मंजुला स्पाह ने मुख्य अतिथि, सभी कवियों एवं कवयित्रियों का आभार व्यक्त करते हुए उत्सव के सफल आयोजन के लिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा का विशेष रूप से धन्यवाद किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। तीन दिवसीय ‘लोक स्वर’ उत्सव का शुभारंभ गीता विद्या मंदिर (जीवीएम) गर्ल्स कॉलेज के इंद्रधनुष सभागार में बुधवार को सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुनीता दुआ सहगल की प्रस्तुतियों के साथ हुआ था, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी अजय गुप्ता उपस्थित रहे।











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