
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को मुजफ्फरनगर के शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। सेवारत शिक्षकों के लिए टेट (TET) की अनिवार्यता के विरोध में सैकड़ों शिक्षक और शिक्षिकाओं ने गवर्नमेंट इंटर कॉलेज (GIC) महावीर चौक से कचहरी तक विशाल मशाल जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि एक विशेष अध्यादेश लाकर सेवारत शिक्षकों को इस नियम से तत्काल राहत प्रदान की जाए, अन्यथा देश भर के लाखों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।


मानसिक तनाव और नौकरी पर तलवार: शिक्षक नेताओं ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद देश के लगभग 12 लाख शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। वर्षों से निष्ठापूर्वक सेवा कर रहे शिक्षकों को अब फिर से पात्रता परीक्षा पास करने के लिए कहना तर्कसंगत नहीं है। अटेवा जिलाध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार गर्ग और प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राकेश राठी ने संयुक्त रूप से कहा कि शिक्षक केवल शिक्षण ही नहीं, बल्कि जनगणना, चुनाव और एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों को भी बखूबी निभाते हैं। इस अनिश्चितता के कारण शिक्षक गहरे मानसिक तनाव में हैं, जिसके चलते कई साथियों की अकाल मृत्यु भी हो चुकी है।

एकजुट हुए विभिन्न शिक्षक संगठन: जुलूस में अटेवा, टीचर सेल्फ केयर टीम (TSCT), प्राथमिक शिक्षक संघ, भारतीय किसान यूनियन (शिक्षक प्रकोष्ठ), उर्दू शिक्षक एवं कर्मचारी संघ और विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ जैसे संगठनों के पदाधिकारी और जनपद के सभी ब्लॉकों के शिक्षक शामिल रहे। डॉ. फर्रुख हसन, प्रीत वर्धन शर्मा, और राम रतन ने संबोधित करते हुए कहा कि सांसदों द्वारा संसद में प्रश्न उठाए जाने के बावजूद केंद्र सरकार की चुप्पी निराशाजनक है। यदि जल्द ही अध्यादेश नहीं लाया गया, तो शिक्षक समाज बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा। प्रदर्शन में मनीष गोयल, अवनीश राठी, सुधीर पोरिया, अमित तोमर और सैकड़ों की संख्या में महिला शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहीं।












Total views : 276219