
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जनपद के शिक्षक संगठनों ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरुद्ध अपनी मुहिम को तेज करते हुए गुरुवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय पर जोरदार हुंकार भरी। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ, महिला शिक्षक संघ, भाकियू (शिक्षक प्रकोष्ठ) और टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया समेत विभिन्न संगठनों के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने एकजुट होकर सरकार की इस नीति को ‘दमनकारी’ करार दिया।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार अनुभवी शिक्षकों पर पात्रता परीक्षा की बाध्यता जबरन थोप रही है। आंदोलन की कड़ी में शिक्षकों ने पहले ट्विटर अभियान चलाया और तीन दिनों तक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इसी क्रम में आज बीएसए कार्यालय पर धरना देने के पश्चात शिक्षकों का हुजूम मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष बालेंद्र सिंह ने कहा कि किया कि ‘शिक्षा का अधिकार नियम 2009’ (RTE) के अनुसार, 27 जुलाई 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य है, लेकिन पुराने शिक्षकों को इससे मुक्त रखा गया था। अब पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए इसे अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है।
शिक्षकों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर को सौंपा। प्रदर्शन में महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष ऊषा चौहान, रश्मि मिश्रा, प्रीति चौहान, महिला शिक्षक संघ की पूर्व जिलाध्यक्ष वंदना बालियान, प्राथमिक शिक्षक संघ जूनियर से मोनिका राठी, रश्मि धीमान, राखी चौधरी, प्रीति ठाकुर, रंजना मौर्य, रजनी, पुष्पेंद्र चौधरी, पूनम चौधरी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि नीतियों में लचीलापन नहीं लाया गया, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप लेगा।
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