
लोकपथ लाइव, मुरादाबाद। जनपद के सबसे चर्चित और खौफनाक ‘मैनाठेर कांड’ में करीब 15 साल के लंबे इंतजार के बाद शनिवार को न्याय की जीत हुई। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तत्कालीन एसएसपी (वर्तमान में लखनऊ में तैनात एडीजी) अशोक कुमार सिंह पर हुए जानलेवा हमले के मामले में 16 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले ने न केवल खाकी का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि अपराधियों को कड़ा संदेश भी दिया है।


यह मामला 6 जुलाई 2011 का है। पुलिस टीम मैनाठेर इलाके में एक छेड़छाड़ के आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों ने ‘धार्मिक पुस्तक के अपमान’ की झूठी अफवाह फैला दी। देखते ही देखते हजारों की उग्र भीड़ सड़कों पर उतर आई। तत्कालीन एसएसपी अशोक कुमार सिंह और जिलाधिकारी हालात संभालने मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्मादी भीड़ ने उन पर हमला बोल दिया।

मरा हुआ समझकर भाग गए थे हमलावर
भीड़ ने आईपीएस अशोक कुमार सिंह को चारों तरफ से घेरकर पत्थरों और लाठियों से बेरहमी से पीटा। हमला इतना भीषण था कि अधिकारी लहूलुहान होकर अचेत हो गए। हमलावर उन्हें मृत समझकर मौके से फरार हो गए थे। उन्हें गंभीर हालत में पहले स्थानीय अस्पताल और फिर दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया, जहाँ वे महीनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे।
देर है, अंधेर नहीं: कानून व्यवस्था की जीत
सजा का ऐलान होते ही कोर्ट परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए नजीर है जो कानून को हाथ में लेते हैं। सरकारी पक्ष ने मजबूती से दलीलें पेश कीं, जिसके आधार पर कोर्ट ने 16 लोगों को उम्रकैद की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया है।
पुलिस विभाग में संतोष की लहर
वर्तमान में लखनऊ में एडीजी के पद पर कार्यरत अशोक कुमार सिंह ने इस फैसले पर संतोष जताया है। मुरादाबाद के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला न्याय प्रणाली में अटूट विश्वास पैदा करता है। 15 साल के लंबे कानूनी सफर के बाद आए इस फैसले ने साबित कर दिया कि खाकी पर हाथ उठाने वालों का अंजाम कालकोठरी ही है।










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