
लोकपथ लाइव डेस्क। किडनी की सेहत के प्रति बढ़ती लापरवाही मरीजों की जान पर बन रही है। किडनी खराब होने पर शरीर में बीमारियां तक बढ़ने से मरीज कमजोर पड़ता है, क्योंकि किडनी हमारे शरीर का नेचुरल फिल्टर है, जो न केवल खून को साफ करती है, बल्कि विषैले तत्वों को बाहर निकालकर शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखती है। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली और अनियमित खान-पान के कारण आज किडनी के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।


शहर के शांति मदन अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. सहज गर्ग ने बताते हैं कि किडनी की बीमारी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में बहुत सामान्य लगते हैं। अक्सर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब किडनी 60-70 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हो चुकी होती है। यदि लोग पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, चेहरे या पैरों पर सूजन, कमर के निचले हिस्से में दर्द और लगातार थकान जैसे लक्षणों को गंभीरता से लें, तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।

वहीं जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता व डाइलेसिस यूनिट प्रभारी डा.योगेंद्र त्रिखा बताते हैं कि किडनी फेलियर के 50 प्रतिशत से अधिक मामलों का मुख्य कारण अनियंत्रित डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोग बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर्सका सेवन करते हैं, जो सीधे तौर पर किडनी की कार्यक्षमता को नष्ट कर देती हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 10 से अधिक मरीजों को डायलेसिस दिया जा रहा है। इससे पता चलता है कि किडनी के रोगियों की संख्या कितनी ज्यादा हो रही है।










Total views : 239540