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लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरु, सियासी घमासान

सदन में 10 घंटे चलेगी चर्चा, अध्यक्ष की कुर्सी पर जगदंबिका पाल, विपक्ष ने उठाए सवाल
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: संसद के गलियारों में मंगलवार को माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा आखिरकार शुरू हो गई है। सोमवार को पश्चिम एशिया संकट को लेकर हुए हंगामे के कारण यह चर्चा टल गई थी, लेकिन आज सदन में विपक्ष ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी।

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भारतीय संसदीय इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण और हंगामेदार साबित हो रहा है। संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत हो गई है। पीठासीन अध्यक्ष द्वारा इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, जिसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। लोकसभा में ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत की। इससे पहले मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (नियम 94 के तहत) औपचारिक रूप से पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा से पहले और उसके दौरान विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही में व्यवधान देखा गया है। इसके अलावा, विपक्ष ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन की अध्यक्षता कौन करेगा और पीठासीन अधिकारी का चयन कैसे किया गया। लोकसभा में उपाध्यक्ष का चुनाव नही हुआ औ ऐसे में स्पीकर पैनल में शामिल जगदंबिका पा सदन की अध्यक्षता कर रहे हैं। चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने स्पीकर के कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए। विपक्ष का आरोप है कि सदन में विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है और अध्यक्ष का रवैया निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मर्यादाओं को बनाए रखने के लिए स्पीकर का पद सर्वोपरि है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में विश्वास कम हुआ है।

क्या है संसदीय नियम
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, जब अध्यक्ष के खिलाफ खुद अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, तो वे सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। हालांकि वे सदन में उपस्थित रह सकते हैं और अपना पक्ष रख सकते हैं। इस प्रक्रिया के चलते सदन में पीठासीन अधिकारी की भूमिका को लेकर भी पक्ष-विपक्ष में बहस देखी गई। सदन के अंदर और बाहर विपक्ष एकजुट होकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

सदन में सत्ता और विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
संसद भवन परिसर में मंगलवार को सुबह से ही गहमागहमी का माहौल था। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने स्पीकर के खिलाफ लाए गए अपने प्रस्ताव को मजबूती से रखा। विपक्ष का तर्क है कि सदन की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। वहीं, सत्ता पक्ष ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से “राजनीतिक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

दोनों पक्षों की तैयारी
लोकसभा में इस प्रस्ताव पर विपक्ष अपनी विभिन्न मांगों और स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल उठाकर सरकार को बैकफुट पर लाने की कोशिश में है। जबकि सत्ता पक्ष अध्यक्ष का पुरजोर बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है और संख्या बल के आधार पर सरकार को कोई खतरा न होने का दावा कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल पूरी दिल्ली और देश की निगाहें संसद की कार्यवाही पर टिकी हैं। गौरतलब है कि विपक्ष ने स्पीकर पर ‘पक्षपातपूर्ण रवैया’ अपनाने और विपक्षी नेताओं (विशेषकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी) को सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर न देने का आरोप लगाया है। इस प्रस्ताव को तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों का भी समर्थन प्राप्त है।

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