
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ लेने वाले मरीजों की संख्या जिले में तेजी से बढ़ रही है। निजी अस्पतालों पर मरीजों का विश्वास अधिक बढ़ा रहा है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अलग-अलग केंद्रों पर विशेषज्ञ चिकित्सक होने का दावा करता है, लेकिन स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं होने के कारण ही सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ लेने वाले मरीज निजी अस्पतालों में उपचार कराने वालों से कम ही है। आयुष्मान योजना के पैनल में शामिल सभी 14 अस्पतालों में इलाज लेने वाले मरीज आंखो व अन्य छोटी बीमारी के हैं।


मुजफ्फरनगर में 14 सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना का इलाज
जनपद के जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल सहित सभी 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष्मान योजना का लाभ मरीजों को दिया जा रहा है। इसमें आपरेशन से लेकर अन्य भर्ती मरीजों के इलाज की सुविधा है। जनपद की जानसठ, बुढ़ाना, शाहपुर, खतौली, चरथावल, बघरा, भोपा, फलौदा, मखियाली, सिसौली, गढ़ीनौआबाद, तुकलकपुर में योजना का लाभ मिल रहा है, लेकिन अलग-अलग सीएचसी पर अलग-अलग मर्ज के चिकित्सक है। वहां आपरेशन की सुविधाएं नहीं है। ज्यादातर सीएचसी पर एमबीबीएस चिकित्सक होने से मानक पूरे नहीं हो रहे है। उधर, जिला अस्पताल में भी हड्डी रोग, आंखों व अन्य छोटे आपेरशन की सुविधा मिल रही है। इसके अलाव कैंसर, किड़नी, दूरबीन आपरेशन की सुविधाएं नहीं है। वहीं हदय रोग विभाग में भी विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी होने से सरकारी सिस्टम में मानक अधूरे है।

निजी अस्पतालों में 87 हजार, सरकारी में 34 हजार का मिला इलाज
विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी और सुविधाएं कम होने का ही कारण है कि जिले के ज्यादातर आयुष्मान योजना के पात्र मरीज निजी अस्पतालों का रूख कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर में सात लाख के करीब मरीज इस योजना के पात्र है, जिसमें से डेढ लाख मरीजों ने अभी तक इलाज पाया है। आंकड़े पर बात करें तो 87 हजार मरीजों ने आयुष्मान पैनल के निजी अस्पतालों में इलाज पाया, जबकि 34901 मरीजों ने सरकारी अस्पताल में इलाज पाया है।
क्या कहते हैं मुजफ्फरनगर के सीएमओ...
हमारे जिले में जिला अस्पताल सहित सभी सीएचसी आयुष्मान के पैनल में है। नेत्र रोग, ईएनटी सहित विभिन्न बीमारियों के विशेषज्ञ हमारे पर है। अन्य रोग के विशेषज्ञों को आनकाल भी बुला लिया जाता है। कैंसर और दूरबीन के इलाज की कमी है। मानकों को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
– डा. सुनील कुमार तेवतिया, सीएमओ










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