
लोकपथल लाइव, गाजियाबाद। जिले में संचालित प्रदूषण जांच केंद्रों पर मिल रही अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने बड़े पैमाने पर जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। एआरटीओ प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत जिले के सभी 260 प्रदूषण जांच केंद्रों की चरणबद्ध तरीके से सघन जांच की जाएगी।


मशीनों की सटीकता और ऑपरेटर की योग्यता पर फोकस

एआरटीओ प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहनों की प्रदूषण जांच पारदर्शी और सटीक तरीके से हो। निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से दो बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा।इसमे मशीनों की कार्यक्षमता देखी जाएगी कि क्या केंद्रों पर लगी मशीनें मानक के अनुरूप हैं और सही रीडिंग दे रही हैं? वहीं ऑपरेटर की पात्रता की जांच होगी, जिसमें देखा जाएगा कि क्या जांच करने वाला व्यक्ति प्रशिक्षित और विभाग द्वारा अधिकृत है?
नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
परिवहन विभाग को पिछले कुछ समय से केंद्रों पर बिना प्रशिक्षण के कर्मचारियों द्वारा जांच किए जाने और मशीनों में तकनीकी खामियों की शिकायतें मिल रही थीं। एआरटीओ ने चेतावनी दी है कि यदि निरीक्षण के दौरान कोई भी केंद्र मानक के विपरीत कार्य करता पाया गया या वहां अप्रशिक्षित ऑपरेटर मिला, तो संबंधित केंद्र का लाइसेंस निरस्त करने समेत अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी।
एआरटीओ और आरआई संभालेंगे कमान
इस पूरी जांच प्रक्रिया में एआरटीओ और आरआई (संभागीय निरीक्षक) स्वयं शामिल रहेंगे। टीम केंद्रों के रिकॉर्ड, मशीनों के मापन की सटीकता और संचालन व्यवस्था की बारीकी से जांच करेगी। विभाग का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए यह बेहद जरूरी है कि प्रदूषण जांच केंद्रों पर कोई लापरवाही न बरती जाए











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