
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। देश में बड़े उद्योग घरानों के दिवालिया होने का सबसे सीधा और घातक असर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर पड़ रहा है। करोड़ों रुपये का माल भेजने के बाद भुगतान अटकने और सरकार को जीएसटी पहले ही जमा करने के कारण एमएसएमई क्षेत्र दोहरी मार झेलने को मजबूर है। इस संकट से छोटे उद्यमियों को उबारने के लिए इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में बड़े बदलावों की मांग उठाई है।
आईआईए मुजफ्फरनगर चैप्टर के चेयरमैन अमित जैन ने केंद्रीय वित्त मंत्री को भेजे पत्र भेजा है। कार्यालय पर हुई बैठक में बताया गया कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए बकाया रकम केवल एक बिल नहीं, बल्कि उनकी कार्यशील पूंजी और अस्तित्व का सवाल है। आईआईए सहारनपुर डिवीजन के मंडल चेयरमैन पवन कुमार गोयल ने कहा कि माल बेचने के बाद भुगतान न मिलना और भरा हुआ टैक्स भी वापस न होना दोहरा अन्याय है। आईआईए की 6 सूत्रीय प्रमुख मांगें है, जिसमें अति सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के बकाये को दिवाला संहिता में कर्मकार देय की तर्ज पर सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। समाधान योजना या परिसमापन की राशि में से एमएसएमई के लिए न्यूनतम सुरक्षित भुगतान तय किया जाए। इसके अलावा एनसीएलटी में एमएसएमई का पक्ष रखने के लिए सुविधादाता, अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त होने की मांग की। वहीं एमएसएमईडी अधिनियम 2006 के भुगतान सुरक्षा अधिकारों को आईबीसी में पूर्ण मान्यता मिले। जीएसटी वापसी व्यवस्था और पारदर्शिता और समयबद्धता की मांग उठाइ्र है। यह मांग पत्र प्रधानमंत्री, एमएसएमई मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, आईबीबीआई और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी प्रेषित किया गया है। आईआईए ने चेतावनी दी है कि समाधान न होने पर देशभर के उद्यमी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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