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जीएसटी घोटाला: बिना बिल हरियाणा जा रहा लाखों का माल पकड़ा

लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर/मेरठ: उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग की खतौली मोबाइल स्क्वाड टीम ने एक बेहद शातिर और बड़े अंतर-राज्यीय राजस्व घोटाले का पर्दाफाश किया है। विभाग ने मेरठ के मटौर में केवल कागजों पर चल रही एक फर्जी कंपनी (शेल फर्म) के जरिए बिना वैध टैक्स इनवॉइस और फर्जी बिल्टी के सहारे हरियाणा भेजे जा रहे एक बड़े मालवाहक वाहन को धर दबोचा है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) चोरी के इस रैकेट के सामने आने के बाद विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

बिना फैक्ट्री अस्तित्व के चल रहा था खेल

मामला तब प्रकाश में आया जब जीएसटी की खतौली मोबाइल यूनिट के सहायक आयुक्त नितिन कुमार वाजपेयी ने शाहपुर क्षेत्र में चेकिंग के दौरान 20 लाख रुपये मूल्य के करीब 10,070 किलोग्राम ‘लेड इनगाट्स’ (सीसा धातु) से लदे एक वाहन को रोका। यह वाहन मुजफ्फरनगर के बेगराजपुर से माल लोड कर हरियाणा जा रहा था। जब अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की, तो पता चला कि परिवहन के लिए मेरठ के मटौर की एक फर्म का ई-वे बिल जनरेट किया गया था, लेकिन इसकी बिल्टी पूरी तरह फर्जी थी।

संदेह होने पर जब राज्य कर विभाग की टीम ने मेरठ के मटौर स्थित पते पर छापेमारी और भौतिक सत्यापन किया, तो वहां उस नाम की कोई भी फैक्ट्री या संस्थान अस्तित्व में ही नहीं मिला। यानी कागजों पर फर्जी फर्म बनाकर इस पूरे काले कारोबार को अंजाम दिया जा रहा था।

192 फर्जी डिलीवरी चालान से करोड़ों की कर चोरी 

गहनता से की गई जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस सिंडिकेट ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक करीब 192 फर्जी डिलीवरी चालान जारी किए हैं। गैंग बिना कोई वैध टैक्स इनवॉइस जारी किए ही इतने बड़े पैमाने पर माल इधर से उधर भेज रहा था, जिससे सीधे तौर पर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया गया। सहायक आयुक्त नितिन कुमार वाजपेयी ने बताया कि 20 लाख रुपये के माल और वाहन को सीज कर दिया गया है।

केंद्रीय एजेंसियों और हरियाणा DGGI को किया अलर्ट

मामले के तार कई राज्यों से जुड़े होने के कारण यूपी राज्य कर विभाग ने इस संबंध में हरियाणा के जीएसटी अधिकारियों, महानिदेशक माल एवं सेवा कर आसूचना (DGGI) और मेरठ के एसआईबी (विशेष अनुसंधान शाखा) के ज्वाइंट कमिश्नर को अवगत कराकर संयुक्त जांच की सिफारिश की है। इसके साथ ही केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को भी विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है। विभाग अब मुजफ्फरनगर और मेरठ बेल्ट की उन असली फैक्ट्रियों का पता लगाने में जुटा है, जो पर्दे के पीछे रहकर इस ‘शैडो नेटवर्क’ को ऑपरेट कर रही थीं।

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