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मुजफ्फरनगर में फर्जी मार्कशीट-डिप्लोमा बनाने वाला गिरोह पकड़ा, अस्पतालों से जुडे तार

लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जनपद की थाना ककरौली पुलिस ने युवाओं को फर्जी डिप्लोमा, प्रमाण-पत्र और मार्कशीट तैयार कर बेचने वाले एक बड़े संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इस गिरोह के तार मेरठ के नामचीन अस्पतालों से भी जुड़े पाए गए हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, कंप्यूटर उपकरण, प्रिंटर, लेमिनेशन मशीन, मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। इस गंभीर फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार वर्मा ने मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत ककरौली पुलिस जटवाड़ा चौकी क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से विश्वसनीय सूचना मिली कि फर्जी डिप्लोमा और मार्कशीट तैयार कर मोटी रकम वसूलने वाले गिरोह के कुछ सदस्य नहर पटरी के पास किसी ग्राहक की फिराक में मौजूद हैं। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने घेराबंदी कर मौके से पांच आरोपियों को दबोच लिया। इनसे सख्ती से की गई पूछताछ के बाद गिरोह के अन्य नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसके आधार पर पुलिस ने तत्काल मेरठ स्थित न्यूटिमा हॉस्पिटल और हिम्स हॉस्पिटल में छापेमारी कर वहां से पांच और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
क्यूआर कोड लगाकर बनाते थे असली जैसे दस्तावेज: पुलिस पूछताछ में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह गिरोह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से फर्जी नर्सिंग एवं मिडवाइफरी डिप्लोमा, रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र और मार्कशीट तैयार करने के अवैध धंधे में लिप्त था। शातिर अपराधी इन दस्तावेजों पर फर्जी क्यूआर कोड भी लगाते थे, ताकि ऑनलाइन स्कैन करने पर भी दस्तावेज असली प्रतीत हों और किसी को शक न हो। शुरुआती दौर में यह गिरोह संबंधित दलालों को चार हजार रुपये में दस्तावेज बेचता था, जिसे आगे जरूरतमंद युवाओं और महिलाओं को 25-25 हजार रुपये तक में बेचकर मोटी अवैध कमाई की जाती थी।
बिना पढ़ाई के कई राज्यों में दिला दी नर्सिंग की नौकरी: पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने बिना किसी पढ़ाई या ट्रेनिंग के कई महिलाओं और युवकों को फर्जी नर्सिंग सर्टिफिकेट के आधार पर विभिन्न अस्पतालों में रोजगार भी दिलवा दिया था। अब तक की जांच में उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य कई राज्यों में करीब एक दर्जन से ज्यादा लोगों को इस फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नर्सिंग केयर की नौकरी मिलने की बात सामने आई है, जो मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। पुलिस ने सभी 10 आरोपियों के खिलाफ थाना ककरौली में संबंधित सुसंगत धाराओं में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है और गिरोह के अन्य मददगारों की तलाश शुरू कर दी है।
 इनसे हुई बरामदगी
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 17 फाइलों में सुरक्षित रखे गए विभिन्न मेडिकल पाठ्यक्रमों के फर्जी डिप्लोमा और मार्कशीट, 10 मोबाइल फोन, दो सीपीयू, दो मॉनिटर, एक प्रिंटर, एक लेमिनेशन मशीन, हार्ड डिस्क, फोटो पेपर, जाली आईडी कार्ड और एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद की है। बरामद उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

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