
प्रस्ताव पर फैसला होने तक सदन में नहीं आएंगे ओम बिरला
अविश्वास प्रस्ताव के लिए पेश नोटिस में पाई गई तकनीकी खामियां
ओ.पी. पाल (लोकपथ लाइव, नई दिल्ली): लोकसभा में विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया गया है। प्रस्ताव पर 116 विपक्षी सांसदो के हस्ताक्षर हैं। खास बात है कि प्रस्ताव के लिए दिये गये नोटिस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किये हैं। वहीं अविश्वास प्रस्ताव नोटिस पेश होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस प्रस्ताव पर फैसला आने तक सदन में नहीं आने का फैसला लिया है।


सूत्रों के अनुसार मंगलवार को विपक्षी दलों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाते हुए 118 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ विपक्ष ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को एक नोटिस सौंपा हैं। इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम समेत कई दलों ने प्रस्ताव का समर्थन किया है, लकिन तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। वहीं इस प्रस्ताव पर राहुल गांधी के भी हस्ताक्षर नहीं हैं। नोटिस में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर बार-बार विपक्षी दलों के सदस्यों को सदन में जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर नहीं देने का आरोप लगाया गया है। हालांकि नोटिस में तकनीकी गलती के कारण उसके स्वीकार होने की संभावनाएं भी क्षीण होती नजर आ रही हैं, जिसके कारण विपक्ष की आक्रामक रणनीति के बावजूद असहज की स्थिति में नजर आ रहा है। अविश्वास प्रस्ताव नोटिस की प्रारंभिक जांच में तकनीकी खामियां पाई गईं। मसलन इस नोटिस में वर्ष 2026 की जगह बार-बार 2025 लिखा गया था, जिसे गंभीर प्रक्रियागत चूक माना गया। नोटिस में खामियां सामने आने के बाद कांग्रेस को संशोधित अविश्वास प्रस्ताव पेश करना पड़ा।

प्रस्ताव पर फैसले का इंतजार करेंगे बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक सदन में न आने का निर्णय लिया है। हालांकि स्पीकर ने सदन के सचिव को निर्देश दिया कि वह उनके खिलाफ अविश्वास नोटिस की समीक्षा करें और उपयुक्त कार्रवाई करें। सूत्रों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर नौ मार्च को बिरला को लोकसभा अध्यक्ष के पद से हटाने के लिए कम से कम पचास सांसदों को खड़े होकर समर्थन करने के चर्चा होने की संभावना है। लेकिन लोकसभा में संख्या बल के हिसाब से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने की कोई संभावना नजर नहीं आती।
राज्य सभा में भी शर्मिंदा हुआ था विपक्ष
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया नियमों के तहत ऐसे किसी भी प्रस्ताव में तमाम जानकारी का सटीक और तथ्यों के आधार पर नोटिस का सही होना अनिवार्य होता है। इस नोटिस में साल की गलती सामने आने के बाद नोटिस को स्वीकार नहीं किया गया और विपक्ष को शर्मिंदा होना पड़ा है। इससे पहले राज्यसभा में तत्कालीन उपराष्ट्रपति यानी उच्च सदन के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भी तकनीकी खामियों के कारण खारिज कर दिया गया था, जिसमें उनके उपनाम की वर्तनी में गलती पाई गई थी। इसी प्रकार इस बार तकनीकी गलती के चलते कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को राजनीतिक रूप से शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है।










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