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लखनऊ में संपन्न हुआ 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन

वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में विधायिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण: ओम बिरला
विधायिका को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ तैयार होगा: लोक सभा अध्यक्ष
लोकपथ लाइव, लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधान भवन, लखनऊ में आयोजित 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन के दौरान लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशभर के विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में वृद्धि की दिशा में राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होने कहा कि विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ तैयार किया जाएगा।

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लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश विधान भवन में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के बुधवार को समापन भाषण में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ तैयार करने के संकेत दिए, जिसके लिए एक समिति के गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे देशभर के विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में वृद्धि हो सकेगी। वहीं बिरला ने राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि इस प्रयास से विधानमंडलों को जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का एक प्रभावी मंच बनाया जा सकेगा और सदन अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।

व्यवधान देश के लोकतंत्र के लिए उचित नहीं
इसके अलावा ओम बिरला ने संवाददाताओं से वार्ता के दौरान आगामी बजट सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के बारे में कहा कि सदन में लगातार नियोजित गतिरोध और व्यवधान देश के लोकतंत्र के लिए उचित नहीं हैं। जब सदन में व्यवधान होता है, तो सबसे अधिक नुकसान उस नागरिक का होता है जिसकी समस्या पर चर्चा होनी थी। उन्होंने सभी दलों के नेताओं व सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की तथा कहा कि लोकतंत्र में लोक सर्वोपरि है, और जनता के प्रति हमारी जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर दिन और हर क्षण है। इस सम्मेलन में देश के 24 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से 36 पीठासीन अधिकारियों ने भागीदारी की। सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ्, राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश, उत्तर प्रदेश विधान विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह के अलावा विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

छह महत्वपूर्ण संकल्प पारित
अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में छह महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गये, जिनमें सभी पीठासीन अधिकारी अपनी-अपनी विधायिकाओं के कार्य संचालन के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करेंगे, ताकि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान दिया जा सके। वहीं सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाकर राज्य विधायी निकायों की न्यूनतम तीस (30) बैठकें प्रति वर्ष की जाएँ तथा विधायी कार्यों के लिए उपलब्ध समय और संसाधनों का रचनात्मक एवं प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाएं जनता के प्रति उत्तरदायी हो सकें। विधायी कार्यों की सुगमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को निरंतर सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे जनता और उनकी विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित हो सके तथा सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके। सहभागी शासन की सभी संस्थाओं को आदर्श नेतृत्व प्रदान करना निरंतर जारी रखना, ताकि राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपराएँ और मूल्य और अधिक गहरे तथा सशक्त बन सकें। डिजिटल प्रौद्योगिकी के कुशल उपयोग के क्षेत्र में सांसदों एवं विधायकों की क्षमता निर्माण का निरंतर समर्थन तथा विधायिकाओं में होने वाली बहसों और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु शोध एवं अनुसंधान सहायता को सुदृढ़ करना। इसके अलावा छठें संकल्प में विधायी निकायों के कार्य संपादन का वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर मूल्यांकन एवं तुलनात्मक आकलन (बेंचमार्किंग) करने हेतु एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ का निर्माण, जिससे जनहित में अधिक उत्तरदायित्व के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने हेतु अनुकूल वातावरण स्थापित हो सके।

लोकतंत्र की आत्मा हैं न्याय, समता व बंधुता: योगी आदित्यनाथ
86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायिका को लोकतंत्र की आधारभूत इकाई और संविधान संरक्षक करार देते हुए कहा कि विधायिका भारत के लोकतंत्र की आत्मा के रूप में काम करती है। सीएम योगी ने कहा कि देश में लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था अत्यंत मजबूत है और यह दुनिया के लिए प्रेरणा है। सीएम योगी ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य ‘भारत लोकतंत्र की जननी है’ का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि ग्राम स्वराज की परिकल्पना को गांवों ने साकार किया। देश में रूपरंग, खानपान, वेशभूषा अलग हो सकते हैं, लेकिन पूरा भारत एक भाव-एक भंगिमा के साथ बोलता और सोचता है। उसकी आस्था एक होती है। संसद उस आस्था को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। संसद को आदर्श के रूप में बढ़ाएंगे तो विधायिका और मजबूत-सशक्त होगी। सीएम ने वर्ष में कम से कम 30 बैठकों का प्रस्ताव पारित किए जाने को भी सराहनीय बताते हुए कहा कि यह संसद और विधानसभा के लिए ही नहीं, बल्कि नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों के लिए भी प्रेरणा है।

प्रोएक्टिव होता है पीठ और सरकार का अप्रोच
सीएम योगी ने कहा कि पीठ और सरकार का अप्रोच प्रोएक्टिव होता है, रिएक्टिव नहीं होता। पीठ ने विपक्ष को अधिक मौका दे दिया तो सरकार रिएक्टिव नहीं होती। पीठ पक्ष-विपक्ष में संतुलन बनाती है। सीएम ने यूपी के विधानसभा अध्यक्ष व विधान परिषद के सभापति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जहां भी ऐसे सम्मेलन होते हैं, दोनों लोग जाते हैं। वे केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहते। सीएम ने ऐसे सम्मेलनों को ‘सीखो-सिखाओ’ का मंच बताया।

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