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स्थायी समिति की बैठक के साथ राष्ट्रमंडल के पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन शुरु

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को करेंगे 28वें सीएसपीओसी का उद्घाटन
लोकसभा अध्यक्ष ने की राष्ट्रमंडल देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें
(ओ.पी. पाल)
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: 28वें सीएसपीओसी के अध्यक्ष के रूप में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में बुधवार की शाम नई दिल्ली स्थित लाल किले के संगीति सम्मेलन कक्ष में सीएसपीओसी की स्थायी समिति की बैठक की। राष्ट्रमंडल के पीठासीन अधिकारियों और सभापतियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का उद्घाटन 15 जनवरी गुरुवार को पूर्वाह्न 10.30 बजे संसद भवन परिसर स्थित ऐतिहासिक संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

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संसद परिसर स्थित ऐतिहासिक संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल के पीठासीन अधिकारियों और सभापतियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) के उद्घाटन 15 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इससे पहले बुध्वार को 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) की शुरुआत सीएसपीओसी की स्थायी समिति की बैठक के साथ हुई। यानी 28वें सीएसपीओसी के अध्यक्ष के रूप में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में बुधवार की शाम नई दिल्ली स्थित लाल किले के संगीति सम्मेलन कक्ष में सीएसपीओसी की स्थायी समिति की बैठक हुई। इस बैठक से पूर्व प्रतिनिधिमंडलों को लाल किले का निर्देशित भ्रमण कराया गया तथा बैठक के पश्चात विशेष रूप से तैयार प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इससे आगंतुक गणमान्य प्रतिनिधियों को भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत, स्वतंत्रता संग्राम तथा लोकतांत्रिक यात्रा के प्रतीक इस ऐतिहासिक स्मारक के स्थायी महत्व का अनुभव प्राप्त हुआ। 28वां सीएसपीओसी राष्ट्रमंडल भर में लोकतांत्रिक मूल्यों, संस्थागत अखंडता और प्रभावी संसदीय पर्यवेक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करने की अपेक्षा रखता है, साथ ही वैश्विक संसदीय संवाद के एक आत्मविश्वासी, विश्वसनीय और उत्तरदायी आयोजक के रूप में भारत की भूमिका को भी रेखांकित करता है।

प्रधानमंत्री से प्रतिनिधियों से होगा संवाद
प्रधानमंत्री उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देंगे। इसके उपरांत वे राष्ट्रमंडल तथा स्वायत्त संसदों के सभापतियों एवं पीठासीन अधिकारियों के साथ अनौपचारिक संवाद करेंगे। इस अवसर पर सामूहिक छायाचित्र भी लिया जाएगा। जिससे भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक संसदीय संवाद के केंद्र में स्थापित हुआ है। इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल के 53 राष्ट्रीय संसदों के सभापति एवं पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं। यह सम्मेलन लोकतांत्रिक शासन और संवैधानिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने में विधायिकाओं की उभरती भूमिका पर उच्चस्तरीय विमर्श का मंच प्रदान करेगा। 15 एवं 16 जनवरी 2026 को होने वाली सम्मेलन की कार्यवाही आधुनिक विधायिकाओं से जुड़े समसामयिक विषयों पर केंद्रित होंगी। इनमें संसदीय कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उत्तरदायी उपयोग, संसदीय व्यवहार और सार्वजनिक विमर्श पर सोशल मीडिया का प्रभाव, मतदान से परे नागरिक सहभागिता और संसद की जनसमझ बढ़ाने के नवोन्मेषी उपाय, तथा सांसदों और संसदीय अधिकारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण से संबंधित विषय शामिल हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने में सभापतियों एवं पीठासीन अधिकारियों की भूमिका पर एक विशेष पूर्ण बैठक (स्पेशल प्लेनरी सत्र) को लोक सभा अध्यक्ष संबोधित करेंगे। इसके अतिरिक्त, वे सम्मेलन के पूर्ण सत्र, विशेष पूर्ण सत्र तथा समापन पूर्ण सत्र की भी अध्यक्षता करेंगे।

बिरला की द्विपक्षीय वार्ताएं
सम्मेलन से इतर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अनेक विशिष्ट संसदीय नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। इनमें कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स के स्पीकर फ्रांसिस स्कार्पालेजिया, श्रीलंका की संसद के स्पीकर (डॉ.) जगथ विक्रमरत्ने, सांसद, सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा की स्पीकर सुश्री अज़ारेल एर्नेस्टा, मालदीव की पीपुल्स मजलिस के स्पीकर अब्दुल रहीम अब्दुल्ला, केन्या की नेशनल असेंबली के स्पीकर डॉ. मोसेस मसिका वेटांग’उला, ग्रेनेडा की सीनेट की अध्यक्ष डॉ. डेसिमा विलियम्स, दक्षिण अफ्रीका की नेशनल काउंसिल ऑफ प्रोविन्सेस के उपाध्यक्ष पूबलन गोवेंदर तथा दक्षिण अफ्रीका की नेशनल असेंबली की उपाध्यक्ष डॉ. एनेली लॉट्रिएट शामिल हैं।

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