
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने कहा कि पेपर मिलों में आरडीएफ जलता है, जो मानको पर आधारित है। प्रदूषण कम हो इसके लिए हमारी इकाइयों पर बायलर लगे हैं। आनलाइन मानिटरिंग सिस्टम से सीपीसीबी, यूपीसीबी 24 घंटे मानिटरिंग करती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पेपर मिलों से यदि प्रदूषण होता है तो वह मात्र 10 प्रतिशत है। प्रभात कुमार ने कहा कि 80 प्रतिशत प्रदूषण निर्माण कार्य, धूल आदि कारणों से हो रहा है, जिस पर गहण मंथन किया जा चुका है।
सोमवार को फेडरेशन भवन में आईआइए, फेडरेशन आफ मुजफ्फरनगर कामर्स एडं इंडस्ट्रीज, पेपर मिल एसोशिएशन व लधु उद्योग भारती के पदाधिकारियों ने प्रदूषण विषय पर संयुक्त पत्रकार वार्ता की।
पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने कहा कि मुजफ्फरनगर में उद्योगों को प्रदूषण का मुख्य कारण बताकर जो भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, वह वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उद्योगों से निकलने वाला उत्सर्जन निर्धारित मानकों के अनुरूप होता है तथा उसका निस्तारण वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से किया जाता है। पेपर मिलो में जल रहे आडीएफ से हानिकारक प्रदूषण उत्पन्न नहीं हो रहा है। सभी जगह बायलर लगे हुए हैं। उद्योग में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगा है, जिसका डेटा 24 घंटे यूपी पॉल्यूशन बोर्ड और सीपीसीबी पर जाता रहता है। जब फैक्टरियाँ बंद होती है तब भी एक्यूआई कम नहीं होता।
आईआइए केंद्रीय कमेटी के सचिव कुशपुरी ने कहा कि आरडीएफ विश्व में काफी देशों में बिजली उत्पादन के लिए जलाया जाता है। अमेरिका, चाइना, जापान नीदरलैंड आदि इसका उपयोग करते हैं। सभी मिलो में अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रक उपकरण लगे है, जिससे हवा की क्वालिटी निर्धारित मानको के अनुरूप होती है। स्थानीय उद्योग पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूरी तरह सजग हैं और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित सभी नियमों एवं दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं। यहां सभी पेपर मिल व अन्य उद्योगों आरडीएफ का प्रयोग सीपीसीबी, यूपीपीसीबी, सीएक्यूएम द्वारा निर्धारित नियमों के अंतर्गत लगाए गए हैं और आरडीएफ सिर्फ उद्योगों में ही नहीं वरन नगर निकाय द्वारा भी ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग किया जा रहे हैं।
पेपर मिल संचालक प्रभात कुमार ने कहा कि जिले में सभी प्रमुख औद्योगिक इकाइयों से संबंधित उत्सर्जन एवं पर्यावरणीय डाटा का विस्तृत अध्ययन किया है। इस संकलित डाटा के आधार पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण केवल उद्योगों की वजह से नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं। आरडीएफ चलने पर उद्योगों से केवल 2.5पीएम प्रदूषण होता है, जो जिले में केवल 10 प्रतिशत है, जबकि अधिकतर 10पीएम का प्रदूषण है, जो धूल, निर्माण कार्य आदि से होता है। उन्होंने कहा कि धरना देने वालों में एक आदमी खुद हमसे डिमांड करते है कि आरडीएफ हम सप्लाई करेंगे।
यह उद्यमी भी रहे मौजूद
इस दौरान आईआईए डिविजनल सेक्रेटरी पवन कुमार गोयल, अश्विनी खंडेलवाल, अशोक अग्रवाल, विपुल भटनागर, नवीन अग्रवाल, लघु उद्योग भारती के क्षेत्रीय अध्यक्ष राजेश जैन, फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष अंकित संगल, मनीष भाटिया, अमित गर्ग, श्रवण गर्ग, मयंक बिंदल, सचिन बिंदल, परशून अग्रवाल, अंकुर गर्ग, अमित गर्ग आदि मौजूद रहे।
मुजफ्फरनगर: 19 पेपर मिलो में जलता मिला प्रतिबंधित कचरा, नोटिस जारी
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