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लोकसभा में हंगामे के बीच बिना चर्चा के पास हुआ सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक

उच्चतम न्यायाल में अब सीजेआई समेत अब 38 न्यायाधीश हुए
विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के ध्वनिमत से पारित हुआ विधेयक
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक को बिना चर्चा के ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई है। देश की सर्वोच्च अदालत में मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने और न्यायिक प्रक्रियाओं को गति देने के उद्देश्य से लोकसभा ने सोमवार को पारित हुए इस कानून के प्रभावी होने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।

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संसद के मानसून सत्र के तीसरे सप्ताह में सोमवार को भी लोकसभा में विपक्ष का हंगामा जारी है। इसके कारण दो स्थगन के बाद तीसरी बार दो बजे कार्यवाही शुरु होने पर केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956’ में संशोधन का बिल पेश किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इसके 16 मई 2026 को राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश के विरोध में विपक्षी सांसद प्रो. सौगत राय, एन.के. प्रेमचंद्रन और एडवोकेट डीन कुरियाकोस ने निरसन का संकल्प पेश किया, जिसे ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद विधेयक पर चर्चा का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा लेने के बजाए सद में नारेबाजी कर उग्र रुप से हंगामा शुरु कर दिया। इस पर पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद ने सदन में बिल को पारित करने के प्रस्ताव को पेश किया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही को मंगलवार 11 बजे तक स्थगित कर दी गई।

लोकसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयक भी हुए पेश
इससे पहले लोकसभा की सोमवार को 11 बजे प्रश्नकाल के साथ शुरु होते ही विपक्षी दलों के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार हंगामा किया। इस कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोबारा दोपहर 12 बजे की कार्यवाही भी विपक्ष के हंगामे के साथ हुई, लेकिन विपक्ष का हंगामे के बीच ही पीठ पर आसीन कृष्णा प्रसाद तन्नेटी ने शूल्यकाल शुरु कराया। इस मौके पर हंगामें के बीच सदन में श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’ के तहत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में लोक सभा के दो सदस्यों के चुनाव के लिए प्रस्ताव पेश किया, तो वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल साक्ष्यों को समकालीन बैंकिंग पद्धतियों के अनुरूप ढालने के लिए नए कानून के रुप में बैंकर पुस्तक साक्ष्य विधेयक, 2026 और वर्ष 2022-23 के लिए ‘अतिरिक्त अनुदान की मांगों’ का विवरण पेश किया। तो वहीं निर्मला सीतारमन ने आईएसआई को वैधानिक ढांचा देने और वैश्विक स्तर पर स्थापित करने वाले भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 को पेश किया। इसी प्रकार सुधीर गुप्ता और सुप्रिया सुले ने ‘कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर गठित संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। शोर शराबे के बीच कई अन्य आवश्यक दस्तावेज भी सदन के पटल पर रखवाए गये। पीठ के समझाने के बावजूद जब विपक्षी सांसदों ने हंगामा जारी रखा तो पीठ से कृष्णा प्रसाद ने सदन की कार्यवही को दो बजे तक स्थगित कर दी।

विपक्ष के हंगामे पर भारी पड़ी सरकार
इस दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य प्रमुख विपक्षी दलों के सांसदों ने वेल में आकर राम मंदिर के कथित चढ़ावा गबन और दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर उग्र नारेबाजी शुरू कर दी। पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे सांसदों से अपनी सीटों पर लौटकर चर्चा में भाग लेने की बार-बार अपील की। विपक्षी सदस्यों द्वारा शांति न बनाए जाने पर पीठासीन अधिकारी ने शोर-शराबे के बीच ही विधेयक को मतदान के लिए रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

लंबित मुकदमों के बोझ को कम करना प्राथमिकता
इस विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह कदम देश में जारी व्यापक न्यायिक सुधारों की कड़ी का एक हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित पड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए यह बढ़ोतरी अत्यंत आवश्यक थी। सरकार ने इसी वर्ष मई में इस विषय पर अध्यादेश जारी किया था। बढ़ी हुई स्वीकृत संख्या के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में पाँच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। अब इसे विधिवत कानून का रूप दे दिया गया है।

2019 के बाद दूसरी बार बढ़ी न्यायाधीशों की संख्या
कानून मंत्री ने याद दिलाया कि आजादी के बाद पहली बार वर्ष 1956 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 11 की गई थी। समय के साथ न्याय की मांग और मुकदमों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने के कारण अब इसे 38 करने का फैसला लिया गया है, जिससे देश के आम नागरिकों को त्वरित न्याय मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि 2019 के बाद यह पहला अवसर है जब सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि की गई है।
वर्ष          स्वीकृत संख्या (CJI सहित)
1956 –> 11 न्यायाधीश
2019 –> 34 न्यायाधीश
2026 –> 38 न्यायाधीश (वर्तमान पारित)
2019 का बदलाव: वर्ष 2019 में CJI को छोड़कर जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 (कुल 34) की गई थी।

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