
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जनपद में स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे फल-फूल रहे अवैध निजी अस्पतालों और मानक विहीन चिकित्सा केंद्रों के विरुद्ध प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देशन में हुई छापेमारी से शहर के निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान जहाँ एक अस्पताल पूरी तरह फर्जी पाया गया, वहीं एक अन्य प्रतिष्ठित अस्पताल में नवजात बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ होता मिला।


अवैध रूप से चल रहा था जीवन दाता हॉस्पिटल: एसीएमओ डॉ. अजय कुमार की टीम ने कुकड़ा रोड, अलमासपुर चौक के स्थित ‘जीवन दाता हॉस्पिटल’ पर जब औचक छापा मारा, तो हकीकत चौंकाने वाली थी। जांच में पाया गया कि अस्पताल का कोई पंजीकरण (Registration) ही नहीं है। मौके पर न तो कोई योग्य डॉक्टर मौजूद था और न ही अस्पताल के संचालन से जुड़े कोई वैध दस्तावेज मिले। इसे मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ मानते हुए टीम ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर दिया।

अपेक्स हॉस्पिटल की बड़ी लापरवाही: 5 दिन से नहीं आए डॉक्टर: इसके बाद टीम अपेक्स हॉस्पिटल पहुँची, जहाँ की स्थिति और भी चिंताजनक मिली। अस्पताल के एनआईसीयू और वार्डों में 7 नवजात बच्चे भर्ती थे, लेकिन उन्हें देखने वाला कोई विशेषज्ञ डॉक्टर वहां मौजूद नहीं था। अभिलेखों की जांच में सामने आया कि अस्पताल के पंजीकृत चिकित्सक डॉ. अभिषेक यादव 1 अप्रैल से ही अस्पताल नहीं आए हैं।
हद तो तब हो गई जब यह पता चला कि 6 अप्रैल के बाद से किसी भी बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) ने इन मासूमों की सुध नहीं ली। बिना किसी विशेषज्ञ की देखरेख के बच्चों को भर्ती रखना चिकित्सा मानकों का घोर उल्लंघन है। इस गंभीर अनियमितता पर विभाग ने अपेक्स हॉस्पिटल को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।
जारी रहेगा अभियान: सीएमओ: सीएमओ डॉ. सुनील कुमार तेवतिया ने स्पष्ट किया है कि जनपद में किसी भी कीमत पर मानकों के विपरीत अस्पतालों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों की जान जोखिम में डालने वाले अस्पतालों के विरुद्ध यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। इस कार्रवाई से इलाके के अन्य अवैध क्लीनिक और अस्पताल संचालकों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।












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